दुनिया मतलबी, लोग मतलबी, लोगों के मिलने का अंदाज़ मतलबी;
धर्म मतलबी कर्म मतलबी, सारे रीति-रिवाज़ मतलबी.
अंदर से खोखली है ये दुनिया, मुस्कुराते चेहरे, मन में गालियाँ;
ध्यान लगा है खर्च जोड़ने में, पूजा की सजी हैं थालिया.
सम्मान मतलबी संस्कार मतलबी, पूर्वजों का आभार मतलबी;
पुण्य मतलबी, पाप मतलबी, पापी पर गिरती गाज़ मतलबी.
सच मतलबी झूठ मतलबी, सर पर होती खाज मतलबी;
आप मतलबी मैं मतलबी, हमारा परसो कल और आज मतलबी.
अंदर से आती आवाज़, हो जाउ सन्यासी छोड़ कर ये मतलबी समाज,
करूँ मानवता की सेवा, रखूँ इंसानियत की लाज;
मनन चिंतन कर होता है आभास...
अंदर की ये आवाज़ मतलबी, अंदर की आवाज़ मतलबी...