Monday, December 29, 2014

अब माँ 'अधिक' याद आती है!

साल के अंतिम महीनों में,
जब ठंढ अधिक बढ़ जाती है;
चाहत गर्म सरसो तेल के मालिश की,
दवाइयाँ कुछ काम ना आती है;
जब बदली हुई हर चीज़ हमें सताती है,
तब माँ अधिक याद आती है!


जब रेस्टोरेंट का मसालेदार खाना,

हम रोज़ बेमन से खाते हैं;
नान, शाही, कड़ाही, रारा,
हमको कतई ना भाते हैं;
जब पड़ोसी आंटी दाल के छौंक की खुश्बू फैलाती है,
तब माँ अधिक याद आती है!

जब गुस्सा किसी पर आता है,
हमें कोई समझ ना पाता है;
हमसे बड़ा-छोटा, हर कोई,
हमें समझदारी का ठेका दे जाता है;
जब लिपट कर रोने को तकिया हीं हाथ आती है,
तब माँ अधिक याद आती है!

वो गोद में उसके सर रखते हीं,
सारी थकान का मिट जाना;
वो मेरा धूल धूल हो घर आना,
मुझे जबरन बिठा कर खाना खिलाना;
वो मेरे लिए पापा से लड़ना,
बाद में बैठ कर मुझे समझाना;
वो लोरी, वो डाँट, वो दुलार, वो प्यार,
कभी छड़ी लेकर मेरे पीछे भागना;
जब एलबम की एक पुरानी फोटो मुझे रुला जाती है,
तब माँ अधिक याद आती है!

अपने घर से दूर इस शहर में,
अब माँ अधिक याद आती है!

Saturday, July 19, 2014

बस कुछ हफ्तों की बात है...

वो मुझे छोड़ कर शहर गया था,
मुझे डर था, कहीं वो खो ना जाए;
क्यूँ रोती है पगली, हमारा जन्मों का साथ है,
उसने कहा था, ये बस कुछ हफ्तों की बात है.

ये हफ्ते कब महीनों में बदले,

महीने बदल रहे साल में;
वो खोया है उस चकाचौंध में,
मैं फँसी हूँ इस जंजाल में,
क्या ये मेरे प्यार की मात है?
उसने कहा था, ये बस कुछ हफ्तों की बात है.

सफलता मिली उसे शहर जाकर हीं,

आज है वो एक अफ़सर वहाँ;
मैं रोती हूँ उसी जगह पर,
हम मिलते थे अक्सर जहाँ;
इस बगिए में हमारा प्यार, उसका सुख, मेरा दुख, सब आत्मसात है,
उसने कहा था, ये बस कुछ हफ्तों की बात है.

वो सुखी रहे, आगे बढ़े, यही तो मैं चाहती थी,

उसके आगे बढ़ने से मैं पीछे छूट जाऊंगी, ये नहीं जानती थी;
लेकिन उसने कहा था, हमारा जन्मों का साथ है,
और वो आएगा, ये बस कुछ हफ्तों की बात है.
हाँ, बस कुछ हफ्तों की बात है.

Friday, May 23, 2014

बहन! तुम प्यार हो

तुम स्नेह हो, तुम प्रेम हो; तुम मोह हो, तुम दुलार हो;
एक दुखी मरूभूमि में; तुम खुशियों की फुहार हो,
बहन! तुम प्यार हो

खिलखिलाती, मुस्कुराती, जीवन का संदेश हो,
ऊपर वाले की कृपा, आशीर्वाद और आदेश हो;
तुम नर्तकी, तुम गायिका, तुम वाचिका हो,
टूटते विश्वास की आशा हो, तुम संचिका हो;
तुम भगवान में आस्था का आधार हो,
बहन! तुम प्यार हो

पापा की दुलारी हो, माँ की राजकुमारी हो,
अपने भाइयों की एक दोस्त बड़ी प्यारी हो;
मुस्कुराती हुई तस्वीर हो, प्यारी सी गुड़िया हो,
या तो कोई मंत्र हो या खुशियों की पूडिया हो;
बड़े प्यार से देखा गया एक सपना साकार हो,
बहन! तुम प्यार हो
बहन! तुम प्यार हो

Wednesday, April 2, 2014

ये चुनाव का समय है!

हर ओर वादों की बरसात है, ये चुनाव का समय है,
हर कोई कमजोर और पिछडों के साथ है, ये चुनाव का समय है.
जो सच में बाहुबली हैं, बहुसंख्यक हैं, एकजुट हैं,
उनके लिए भी आरक्षण की बात है, ये चुनाव का समय है.

सभी साधु हैं, सभी राजनीतिक दल सजे हैं रक्षकों से,
ये बचाएँगे हमें दूसरे दलों के भक्षकों से;
गर दूसरे दल का है तो आपराधिक संस्कृति का है,
और अपना है तो बाहुबली, रक्षक प्रकृति का है;
दिखा कितना ताक़त, पैसा, पहुँच और औकात है, ये चुनाव का समय है.
हर ओर वादों की बरसात है, ये चुनाव का समय है.

लगता है ग़रीबी और महँगाई मिटेगी, भ्रस्टाचार समाप्त होगा.
हर कोई संपन्न और सब को भोजन पर्याप्त होगा;
अल्पसंख्यक सुरक्षित होंगे, दलितों को सम्मान मिलेगा,
सबके घर तक खाना, सबको रोज़गार और निशुल्क ज्ञान मिलेगा;
अभी तो कागजों में सबके लिए सौगात है, ये चुनाव का समय है.
हर ओर वादों की बरसात है, ये चुनाव का समय है.