Saturday, July 19, 2014

बस कुछ हफ्तों की बात है...

वो मुझे छोड़ कर शहर गया था,
मुझे डर था, कहीं वो खो ना जाए;
क्यूँ रोती है पगली, हमारा जन्मों का साथ है,
उसने कहा था, ये बस कुछ हफ्तों की बात है.

ये हफ्ते कब महीनों में बदले,

महीने बदल रहे साल में;
वो खोया है उस चकाचौंध में,
मैं फँसी हूँ इस जंजाल में,
क्या ये मेरे प्यार की मात है?
उसने कहा था, ये बस कुछ हफ्तों की बात है.

सफलता मिली उसे शहर जाकर हीं,

आज है वो एक अफ़सर वहाँ;
मैं रोती हूँ उसी जगह पर,
हम मिलते थे अक्सर जहाँ;
इस बगिए में हमारा प्यार, उसका सुख, मेरा दुख, सब आत्मसात है,
उसने कहा था, ये बस कुछ हफ्तों की बात है.

वो सुखी रहे, आगे बढ़े, यही तो मैं चाहती थी,

उसके आगे बढ़ने से मैं पीछे छूट जाऊंगी, ये नहीं जानती थी;
लेकिन उसने कहा था, हमारा जन्मों का साथ है,
और वो आएगा, ये बस कुछ हफ्तों की बात है.
हाँ, बस कुछ हफ्तों की बात है.

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