Friday, May 24, 2013

ऐसा ही हूँ मैं

ऐसा ही हूँ मैं!
हाँ, बिल्कुल ऐसा, जैसा दिख रहा हूँ,
हंस रहा हूँ, बोल रहा हूँ, लिख रहा हूँ

समझदार हूँ कुछ ज़्यादा, दोस्त हूँ सबका,

अच्छे लोगों से घिरा हुआ, वादे का पक्का;
कभी कभी कुछ अधिक बोल जाता हूँ,
लोग कहते हैं, मैं इंसान हूँ अच्छा
अपनाया है सबने, जैसा भी हूँ मैं;
ऐसा ही हूँ मैं!

देर करने की आदत बचपन से है,

दोस्तों को इसकी शिकायत उन्नीस सौ छप्पन से है;
दो हज़ार तेरह में भी नही बदला मैं,
जबकि बदलने की चाहत लड़कपन से है
बदल ना पाया  खुद को कैसा भी हूँ मैं;
ऐसा ही हूँ मैं!

माँ पिताजी का आदर्श बेटा, भाभियों का दुलारा देवर,

भाई बहनों का प्यारा भैया, सबने चढ़ा रखा है सर पर;
दोस्तों का कमीना दोस्त, पार्टी का बिंदास डाँसर,
घंटों फोन पे चिपके रहना, हर वीकेंड किसी और के घर
वो घुमंतू होते हैं ना? उन जैसा ही हूँ मैं,
ऐसा ही हूँ मैं!

अब चाहता हूँ मैं थोड़ा बदल जाऊं,

बहुत भटक चुका अब संभल जाऊं;
जीवन का सुनहरा अध्याय शायद पूरा हो चुका,
अगले अध्याय में हीरे सा जड़ जाऊं
बदलने को तत्पर फिर वैसा ही हूँ मैं,
ऐसा ही हूँ मैं!
हां, ऐसा ही हूँ मैं!

Sunday, May 19, 2013

मेरी छोटी बहन

प्यार है स्नेह है, दिल के करीब है;
मिला मैं उससे, ये मेरा नसीब है.
बातों में घुली मिश्री गहन है,
वो मेरी छोटी बहन है.

वो बचपन से हीं बड़ी है,
चॉकलेट और गुडियों के लिए खूब लड़ी है;
मुझे समझाया उसने खूब है,
पर गणित तो मुझसे ही पढ़ी है :)
उसकी आत्मीयता को मेरा नमन है,
वो मेरी छोटी बहन है.

भावुक हूँ, थोड़ा उत्साहित भी,
जीवन का एक मोड़ सामने है;
जीवन के दो भाग दो भिन्न धागों की तरह,
धागों को मिलाने वाला जोड़ सामने है.
विश्वास कि नया धागा समर्थक और प्रसन्न है,
वो मेरी छोटी बहन है.

लिखना तो बहुत कुछ है मुझे,
पर सब लिखना भी ज़रूरी नहीं;
बातें वो बिना बोले भी समझ जाती है,
हमेशा दिखना भी ज़रूरी नही.
वो मेरी भावनाओं का दर्पण है,
वो मेरी छोटी बहन है.