Tuesday, October 16, 2012

आओ आज शब्दों से खेलें

आओ आज शब्दों से खेलें, उल्टा पुल्टा इनका प्रयोग करें;
नियम तोड़ डालें सब प्रचलित, जहाँ तहाँ इनका उपभोग करें.

कड़ाके की बारिश करा दें, मूसलाधार ठंड का मज़ा लें;
चाँद की तपिश से जलन हो, सूरज में शीतलता सज़ा दें.
आसमान नापें गहराई से, कुआँ उगा दें बादल में,
फूलों का स्वाद चखें मज़े से, फलों को इत्र सा फैला दें.

हर लड़की पहलवान लगे अब, लड़कों मे सुंदरता ढूँढें,
बच्चों से आशीर्वाद मिले, बुजुर्गों को खेलों मे उलझा दें.
नेताओं से खेती कराएँ, किसानों को भाषण सीखा दें,
इंजिनीयर्स दिखें सुंदर और बलिष्ठ, अभिनेताओं से पुल बनवा दें.

एक्सर्साइज़ हो ख़तरनाक, स्मोकिंग से स्वास्थ्य बनायें,
कपड़ें पहनें स्याह डाल कर, कलम में इस्तीरी चला लें.
आओ आज शब्दों से खेलें, उल्टा पुल्टा इनका प्रयोग करें;
नियम तोड़ डालें सब प्रचलित, जहाँ तहाँ इनका उपभोग करें

Monday, October 1, 2012

मेरे ख्वाब में एक चेहरा...

ख्वाब मे एक चेहरा धुँधला सा है,
मैं जागता हूँ उसकी खुशबू लिए सांसो में;

उसकी जुल्फें आसमान की तरह असंख्य सितारे समेटे,
मैं उड़ता हूँ उसकी यादें लिए बाहों में,

उसकी आँखें गहरी झील सी शहद से भरे,
मैं डूबता हूँ इन नशीली आहों में,

उसके होंठ गुलाब की पंखुड़ियों सी ताज़गी लिए,
मैं सुगंधित हूँ इन बागों में.

दिल में कुछ ऐसी ही अपरिभाषित तस्वीर लिए,
मैं चलता हूँ अकेला इन राहों में
जाने कब तक अकेला इन राहों में...