Thursday, December 13, 2012

आज उदास है मन


आज उदास है मन, हुआ कुछ नहीं है;
कुछ बातें चुभीं हैं दिल में, उसने कहा कुछ नहीं है.

उसकी बेबाक चुलबुली अदा ने घायल किया है हमें,
आज वो शांत है तो सबकुछ बेमतलब सा है;
चुप रह कर मुझसे खुश होने की उम्मीद है शायद;
बात यही चुभीं है दिल में, कि उसने कहा कुछ नहीं है.

जब ना मरने की और साथ जीने की कसम खाई थी मिलकर,
एक अनकहा वादा था, सताएँगे एक दूसरे को अनवरत,
कल हमने चिढ़ाया था उन्हें उनकी दोस्त को लेकर,
आज उनकी बारी है, और उसने कहा कुछ नहीं है.

आज उदास है मन, हुआ कुछ नहीं है;
कुछ बातें चुभीं हैं दिल में, उसने कहा कुछ नहीं है.

Tuesday, November 20, 2012

मैं जवाब क्यूँ दूं?


जिंदगी मुझसे पूछती है कई सवाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

क्या सोचा अगले पाँच सालों का?
क्या रंग हो गया है तेरे बालों का?
क्या उठा सकोगे खर्च अपने ख्यालों का?
मेरे भविष्य पर है मचा बवाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

अपेक्षाओं तले दबा हूँ, मुझसे सबको कुछ आस है,
जाने अनजाने सबके दिल में, मेरी जगह खास है,
मैं तो सबके पास हूँ क्या कोई मेरे पास है?
कुछ दलित पलों का है मुझे मलाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

मैं तो बचपन की भी नहीं दे सकता दुहाई,
लड़कपन से पहले हीं हो चुका था मैं बड़ा भाई;
आज भी याद है मेरी छुपी हुई, दबी सी सिस्काई,
तमन्ना आज फिर हुई हलाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

जाने कब से अब तक इन सवालों पर प्रश्न चिन्ह है,
मन पहले दुखी था, अब उदास और खिन्न है;
क्यों मेरा सवाल मेरे जीवन के सवालों से भिन्न है?
इन सवालों से मेरा एक हीं सवाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

जिंदगी मुझसे पूछती है कई सवाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

Tuesday, October 16, 2012

आओ आज शब्दों से खेलें

आओ आज शब्दों से खेलें, उल्टा पुल्टा इनका प्रयोग करें;
नियम तोड़ डालें सब प्रचलित, जहाँ तहाँ इनका उपभोग करें.

कड़ाके की बारिश करा दें, मूसलाधार ठंड का मज़ा लें;
चाँद की तपिश से जलन हो, सूरज में शीतलता सज़ा दें.
आसमान नापें गहराई से, कुआँ उगा दें बादल में,
फूलों का स्वाद चखें मज़े से, फलों को इत्र सा फैला दें.

हर लड़की पहलवान लगे अब, लड़कों मे सुंदरता ढूँढें,
बच्चों से आशीर्वाद मिले, बुजुर्गों को खेलों मे उलझा दें.
नेताओं से खेती कराएँ, किसानों को भाषण सीखा दें,
इंजिनीयर्स दिखें सुंदर और बलिष्ठ, अभिनेताओं से पुल बनवा दें.

एक्सर्साइज़ हो ख़तरनाक, स्मोकिंग से स्वास्थ्य बनायें,
कपड़ें पहनें स्याह डाल कर, कलम में इस्तीरी चला लें.
आओ आज शब्दों से खेलें, उल्टा पुल्टा इनका प्रयोग करें;
नियम तोड़ डालें सब प्रचलित, जहाँ तहाँ इनका उपभोग करें

Monday, October 1, 2012

मेरे ख्वाब में एक चेहरा...

ख्वाब मे एक चेहरा धुँधला सा है,
मैं जागता हूँ उसकी खुशबू लिए सांसो में;

उसकी जुल्फें आसमान की तरह असंख्य सितारे समेटे,
मैं उड़ता हूँ उसकी यादें लिए बाहों में,

उसकी आँखें गहरी झील सी शहद से भरे,
मैं डूबता हूँ इन नशीली आहों में,

उसके होंठ गुलाब की पंखुड़ियों सी ताज़गी लिए,
मैं सुगंधित हूँ इन बागों में.

दिल में कुछ ऐसी ही अपरिभाषित तस्वीर लिए,
मैं चलता हूँ अकेला इन राहों में
जाने कब तक अकेला इन राहों में...

Sunday, August 19, 2012

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामना!

हिन्दुस्तानी हूँ, भारत माँ का बेटा;
चाहता हूँ देश मेरा आगे बढ़े सदा

सभी धर्म और समाज मिलकर रहें गर,
होगा अपने देश का नाम सबसे ऊपर

हम होंगे विजयी, हो खेल या व्यापार
नयी पीढ़ी देगी भारत को नया आकार

ये आकार होगा भौगोलिक सीमा से परे
हम रचेंगे नया इतिहास मिल कर सारे

हम होंगे अंग इस स्वर्णिम इतिहास का,
गर्व है, हिन्दुस्तानी हूँ, भारत माँ का बेटा

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामना!
Happy Independence Day!

Saturday, June 2, 2012

वो लड़की

मेरे गाँव की एक लड़की, जाने क्यूँ मुझपर मरती?
कहती है मेरे बिन उसका जीवन रुका है,
यह अधूरा सच है कि 'केवल' उसका दिल दुखा है.

पगली है, बेतुकी भी, कहीं से भी वो नहीं मेरे लायक,
गँवार है, उसमे ज़रा भी अकल नही,
 यूँ हीं फ़ोन करती है, घंटों बोलती रहती है बेमतलब,
मैं वैसे भी बहुत व्यस्त हूँ,
 ये भी नहीं कि उसके बिन मेरा जीवन कुछ रूखा है,
पर यह अधूरा सच है की 'केवल' उसका दिल दुखा है.

उन्हूँ! उसमे कोई बात है ही नहीं कि वो मुझे अच्छी लगे,
तो क्या गर उसकी झूठी फर्माइशें सच्ची लगे,
वो अंजान है, और मैं भी, कि मेरा मन उसकी कई माँगें पूरी कर चुका है,
और यह अधूरा सच है की 'केवल' उसका दिल दुखा है.

Tuesday, April 24, 2012

नियती

समझ रूपी बाँध को तोड़ते हुए जाने कहाँ से भावनाओं की एक बाढ़ सी आती दिख रही है, शब्दों की फिर कमी हुई है मुझे, कोशिश पूरी है पर लगता है डूबना ही मेरी नियती है..