Tuesday, November 20, 2012

मैं जवाब क्यूँ दूं?


जिंदगी मुझसे पूछती है कई सवाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

क्या सोचा अगले पाँच सालों का?
क्या रंग हो गया है तेरे बालों का?
क्या उठा सकोगे खर्च अपने ख्यालों का?
मेरे भविष्य पर है मचा बवाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

अपेक्षाओं तले दबा हूँ, मुझसे सबको कुछ आस है,
जाने अनजाने सबके दिल में, मेरी जगह खास है,
मैं तो सबके पास हूँ क्या कोई मेरे पास है?
कुछ दलित पलों का है मुझे मलाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

मैं तो बचपन की भी नहीं दे सकता दुहाई,
लड़कपन से पहले हीं हो चुका था मैं बड़ा भाई;
आज भी याद है मेरी छुपी हुई, दबी सी सिस्काई,
तमन्ना आज फिर हुई हलाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

जाने कब से अब तक इन सवालों पर प्रश्न चिन्ह है,
मन पहले दुखी था, अब उदास और खिन्न है;
क्यों मेरा सवाल मेरे जीवन के सवालों से भिन्न है?
इन सवालों से मेरा एक हीं सवाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

जिंदगी मुझसे पूछती है कई सवाल, मैं जवाब क्यूँ दूं?

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