Friday, February 1, 2013

जाने क्यूँ उसका इंतजार है...

मैं ये जानती हूँ कि अब वो मेरा नहीं,
फिर भी जाने क्यूँ मुझे उसका इंतजार है

वो... जिसने मुझे बेपरवाह हसाया,
मैंने मेरी मुस्कुराहट अपने होठों पे पाया;
जिसके साथ होने से मैं दुनिया से लड़ गयी,
वो कोई और जहाँ था, ये कोई और संसार है
फिर भी जाने क्यूँ मुझे उसका इंतजार है

मैं उसे भूल जाउ, वो ये कह चुका है,
कोपल पर ठहरा पानी अब बह चुका है;
वो अब किसी और की मुस्कुराहट पर खुश है,
अब उसे किसी और से प्यार है
फिर भी जाने क्यूँ मुझे उसका इंतजार है

मुझे पता है, मैं खुद को ठग रही हूँ,
किसी को पागल तो किसी को बेवकूफ़ लग रही हूँ;
वो मुझे चाहे ना चाहे ये उसकी मर्ज़ी है,
मैं चाहती रहूंगी उसे ये मेरा अधिकार है
पता नही क्यूँ पर मुझे उसका इंतजार है...