Monday, September 20, 2010

मतलबी दुनिया

दुनिया मतलबी, लोग मतलबी, लोगों के मिलने का अंदाज़ मतलबी;
धर्म मतलबी कर्म मतलबी, सारे रीति-रिवाज़ मतलबी.

अंदर से खोखली है ये दुनिया, मुस्कुराते चेहरे, मन में गालियाँ;
ध्यान लगा है खर्च जोड़ने में, पूजा की सजी हैं थालिया.

सम्मान मतलबी संस्कार मतलबी, पूर्वजों का आभार मतलबी;
पुण्य मतलबी, पाप मतलबी, पापी पर गिरती गाज़ मतलबी.

सच मतलबी झूठ मतलबी, सर पर होती खाज मतलबी;
आप मतलबी मैं मतलबी, हमारा परसो कल और आज मतलबी.

अंदर से आती आवाज़, हो जाउ सन्यासी छोड़ कर ये मतलबी समाज,
करूँ मानवता की सेवा, रखूँ इंसानियत की लाज;
मनन चिंतन कर होता है आभास...
अंदर की ये आवाज़ मतलबी, अंदर की आवाज़ मतलबी...

2 comments:

  1. this is so very true...so its only our own conscience that helps us to diffrentiate between the matlabis and the real dear ones

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