दीवार का क्या है, कहीं भी खड़ी हो जाये!
अब हमें ये देखना है कि ये हमारे बीच ना आए ।
ये दीवार ऐसे हीं खड़ी नहीं हुई,
कभी मैंने, कभी तुमने, कुछ ईंटें लगाई हैं
इसमें ।
हमारे रिश्तेदारों ने बालू और सीमेंट दिया है,
अच्छे से सान कर करी ढलाई है इसमें ।
अब बस पानी से कहीं ये सींच ना जाए...
दीवार का क्या है, कहीं भी खड़ी हो जाये!
अब हमें ये देखना है कि ये हमारे बीच ना आए ।
ये दीवार हमारे सिरों के ऊपर तक है,
उचककर भी कुछ नहीं दिखता उधर का ।
इस ओर बड़ा रूखापन और कच्चाई है,
पता नहीं का क्या हाल है उधर का?
डर है कोई नया दोस्त उसे खींच ना जाए...
दीवार का क्या है, कहीं भी खड़ी हो जाये!
अब हमें ये देखना है कि ये हमारे बीच ना आए ।
उधर ना दिखे तो क्या आवाज़ तो जायेगी,
सुनो! मुझे तुमसे बात करनी है ।
ये ईटें, बालू और सीमेंट बेकार में पड़ी है,
इस कच्ची दीवार पर एक लात करनी है ।
बहुत हुआ अब दोस्ती में कोई ऊंच नीच ना आए...
दीवार का क्या है, कहीं भी खड़ी हो जाये!
अब हमें ये देखना है कि ये हमारे बीच ना आए ।

It's beautiful
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