शाम छोटी सी है रात है भारी;
अधूरी है हर मुलाकात हमारी.
यूँ तो अक्सर मिलते रहे हम तुम,
बातें कई की हमने तुमसे, तुमने हमसे;
जाने कब होगा मिलन हमारा,
जाने कब होगी बात हमारी.
शाम छोटी सी है रात है भारी;
अधूरी है हर मुलाकात हमारी.
यूँ तेरा आना, कुछ पल रुक कर चले जाना,
कभी समाज, कभी घर वाले तो कभी कोई और बहाना;
तेरे आते ही चले जाने से,
पूरी ना हो पाती मुलाकात हमारी.
शाम छोटी सी है रात है भारी;
अधूरी है हर मुलाकात हमारी.
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