Friday, May 7, 2010

वो मुस्कुराता हुआ चेहरा...

एक दिन मैं परेशान था, ढूँढ रहा था समस्याओं का हल;
जीवन की परेशानियों को सहने के लिए, कहाँ से मिले बल?
समस्याओं से बचाव के लिए, लगा उम्मीद का पहरा;
जब याद आया मुझे, वो मुस्कुराता हुआ चेहरा...

वही मारा-मारी, वही दौड़-भाग, वही रोज़ के झंझट;
जिंदगी की सूरत खराब ना हो, कोई ओढ़ा दे इसे घूँघट;
आत्मीयता और दोस्ती की रोशनी से, दूर हुआ निराशा गहरा,
जब याद आया मुझे, वो मुस्कुराता हुआ चेहरा...

मोबाइल में कंपन हुई, हुआ मुझे एक अंदेशा;
चेहरे पे मुस्कान ले आई, उसका एक और संदेशा;
कभी-कभी होने वाली बातें और संदेशों की बाढ़ से,
ये दोस्ती का रिश्ता हुआ और भी गहरा;
आज यूँ ही याद आया मुझे, वो मुस्कुराता हुआ चेहरा...

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