हम मिलकर भी नहीं मिलते, एक दूसरे को जान कर भी अनजान हैं,
पास होकर भी दूरी हैं दरमियाँ, साथ तो हैं पर जैसे एक दूसरे के मेहमान हैं;
वैसे मिले तो हैं हम कई बार, पर हमें अब भी पहली मुलाकात का आसार है,
बातें तो कई की हैं हमने, पर वो अब कुछ कहें इसका दोनों को इंतजार है.
उनकी याद नया जीवन दे जाती है, अब सब कुछ अच्छा सा लगता है,
दिन में चलते हुए ख्वाब देखते हैं हम, अभी सब सच्चा सा लगता है;
शायद उधर भी यही आलम है, वो भी सपनें देखती होगी,
यही सोच कर यही मान कर, सपनों की ये दुनिया गुलजार है.
बातें तो कई की हैं हमने, पर वो अब कुछ कहें इसका दोनों को इंतजार है.
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