Monday, February 1, 2010

दो दोस्त

One day, my room mate Vishal's friend Zeeshan came to our room. They were recalling their MBA days and I was just observing.. My observations are....


दो दोस्त मिले हैं कई दिनों बाद,
लगे हैं एक दूसरे की टांग खींचने में;
गलियाँ पे गलियाँ पड़ रही हैं,
लगे हैं रिश्ते की बगिया सिंचने में.

तेरी गर्ल फ़्रेंड कुछ ज़्यादा ही ख्याल रखती है,
तुम्हे लेकर बड़ी पोसेसिव है;
उसका केयर करने का ये अंदाज,
बड़ा ही एक्सेसिव है;
उसका चेहरा देखा था?
जब अचानक मैं पहुँच गया था,
लग गयी थी अपनी आँखें मिंचने में.
दो दोस्त मिले हैं कई दिनों बाद,
लगे हैं रिश्ते की बगिया सिंचने में.

तुझे नई लगता तू कुछ ज़्यादा बोल रहा है,
लगता है थोड़ी चढ़ गयी है;
साले! खंभा लगा चुके हैं घंटा भर में,
अब क्या लगे हो बहाना ढूँढनें मे?
दो दोस्त मिले हैं कई दिनों बाद,
लगे हैं रिश्ते की बगिया सिंचने में.

1 comment:

  1. Dosti ki zubaan mein agar kahoon to Maza aa gaya Dost!!!

    Creativity is something which nobody gets by birth but is achieved over a period of time by undergoing certain Psychophillic and Psychophobic manifestations.

    Great Work Vikas...

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